Vastu Tips For Happy & Prosperous Home | घर में सुख शांति और समृद्धि के लिए वास्तु टिप्स

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वास्तु शास्त्र घर, प्रासाद, भवन अथवा मन्दिर निर्मान करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसे आधुनिक समय के विज्ञान आर्किटेक्चर (Architecture) का प्राचीन स्वरुप माना जा सकता है।

 

दक्षिण भारत में वास्तु का नींव परंपरागत महान साधु मायन को जिम्मेदार माना जाता है और उत्तर भारत में विश्वकर्मा को जिम्मेदार माना जाता है।

वर्तमान में हमारे देश मे वास्तुविद्या या वास्तु शास्त्र (Vastu Shashtra) का बढा ही महत्व है और इसिलिये हम जिस स्थान पर रहते हैं, उस स्थान को वास्तु कहते हैं। जिस प्रकार जिस शरीर को हम सब धारण किये हुए है वह भी पंचतत्त्व से निर्मित है, उसी प्रकार घर बनाने में पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि,वायु और आकाश का समावेश होता है। यही कारण है की जिस भी जगह रहते हैं, उस स्थान या मकान में कौन-सा दोष है, या नही है, इसके अच्छे बुरे प्रभाव को जनने हेतु , हम सुख -दुख का अनुभव करते है और इसी वास्तु की खराबी के कारण हम घर मे दुख-तकलीफ उठाते हैं। हमें यह भी पता नहीं रहता कि उस घर में नकारात्मक ऊर्जा है या सकारात्मक। यदि घर में वास्तु दोष होता है, तब उस घर में रहने वाले घर के स्वामी और सदस्यों के ऊपर विपरीत प्रभाव होता है, और अनेक प्रकार के कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यथार्थवादी दृष्टिकोण यह है कि घर में यदि आपको अच्छी सुकून की नींद, अच्छा सेहतमंद भोजन और भरपूर प्यार-अपनत्व नहीं मिल रहा है तो घर में वास्तुदोष है। घर है तो परिवार और संसार है। घर नहीं है तो भीड़ के बीच सड़क पर हैं। घर में सामान रखते समय दिशाअों का ध्यान रखा जाए तो जीवन खुशहाल रहता है।

घर में वस्तुएं दिशा के अनुसार न रखी हों तो वास्तुदोष (Vastu dosh) होने से सुख-समृद्धि में बाधाएं आती हैं। यदि ऐसा हो तो कुछ सरल उपाय करके इन दोषों को दूर किया जा सकता है।

1. घर का मुख्य दरवाजा (Main Entrance Of House)

वास्तु के अनुसार घर के मुख्य प्रवेशद्वार (main door) से धनात्मक ऊर्जा (positive energy) मिलती है। घर बनाते समय घर के मुख्य द्वार उसकी सजावट हमारे लिए लाभदायक होती है। सरल वास्तु के अनुसार घर के मुख्य के सामने किसी भी प्रकार की बाधा नही होनी चाहिए जैसे की पेड़ – पौधे। वास्तु के अनुसार पूर्व (East) दिशा का दरवाजा उत्तम माना गया है। घर का मुख्य दरवाजा (South facing) दक्षिणमुखी नहीं होना चाहिए। परन्तु आजकल लोग फ्‍लैट में रहते हैं तो सभी के दरवाजे एक जैसे एवं आमने सामने होते हैं, जिससे जाहिर है किसी न किसी का मुख्या दरवाजा दक्षिड़ दिशा में पड़ेगा ही। अगर मजबूरी में दक्षिणमुखी दरवाजा बनाना पड़ गया हो, तो दरवाजे के सामने एक बड़ा सा आईना लगा दें। मुख्य दरवाजा छोटा और उसके पीछे का दरवाजा बड़ा नहीं होना चाहिए। मुख्य दरवाजा बड़ा होना चाहिए।

 

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दरवाजे के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Important Main doorVastu Tips

  • एक सीध में तीन दरवाजे नहीं होना चाहिए।
  • घर में दो प्रवेश द्वार होने चाहिए। एक बड़ा दूसरा छोटा।
  • प्रवेश द्वार मकान के एकदम कोने में न बनाएं।
  • मकान के भीतर तक जाने का मार्ग मुख्य द्वार से सीधा जुड़ा होना चाहिए।
  • मकान के ठीक सामने विशाल दरख्त न हो तो बेहतर।
  • मुख्य द्वार के ठीक सामने किसी भी तरह का कोई खम्भा न हो।
  • खुला कुआं मुख्य द्वार के सामने न हो।
  • मुख्य द्वार के सामने कोई गड्ढा अथवा सीधा मार्ग न हो।
  • कचरा घर, जर्जर पड़ी इमारत या ऐसी कोई नकारात्मक चीज मकान के सामने नहीं होनी चाहिए।
  • दरवाजे के सामने उपर जाने के लिए सीढ़ियां नहीं होना चाहिए।
  • एक पल्ले वाला दरवाजा नहीं होना चाहिए। दो पल्ले वाला हो।
  • मुख्य द्वार त्रिकोणाकार, गोलाकार, वर्गाकार या बहुभुज की आकृति वाला नहीं होना चाहिए।
  • मुख्यद्वार खोलते ही सामने सीढ़ी नहीं बनवाना चाहिए। वास्तु अनुसार *सीढ़ियों के दरवाजे का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
  • मुख्य दरवाजा छोटा और उसके पीछे का दरवाजा बड़ा नहीं होना चाहिए। मुख्य दरवाजा बड़ा होना चाहिए।
  • दरवाजों के कब्जों में तेल डालते रहें अन्यथा दरवाजा खोलते या बंद करते समय आवाज करते हैं, जो वास्तु के अनुसार अत्यंत अशुभ तथा अनिष्टकारी होता है।

 

2. घर का पूजाघर (Prayer Room Of house)

वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा (North-East) को ईशान कोण माना गया है। ये घर का सबसे पवित्र दिशा होती है। जल तत्व से संबंध रखने वाली इस दिशा के स्वामी रूद्र हैं। इस दिशा को भी सदैव पवित्र रखना चाहिए अन्यथा घर परिवार में कलह की आशंका बनी रहती है। इस दिशा में पूजाघर स्थापित करें। यदि पूजाघर किसी अन्य दिशा में हो तो पानी पीते समय मुंह ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखें। भूल से भी भगवान की तस्वीर या मूर्ति आदि नैऋत्य कोण (दक्षिण – पश्चिम का कोना (South-West) में न रखें। इससे बनते कार्यों में रुकावटें आती हैं

 

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पूजाघर के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Vatu Tips For Pooja Room

  • पूजा घर शयन-कक्ष (Bed Room) में न बनाएं।
  • पूजाघर के ऊपर या नीचे की मंजिल पर शौचालय या रसोईघर नहीं होना चाहिए, न ही इनसे सटा हुआ।
  • सीढ़ियों के नीचे पूजा का कमरा बिलकुल नहीं बनवाना चाहिए।
  • यह हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए, तहखाने में नहीं।
  • पूजा का कमरा खुला और बड़ा बनवाना चाहिए।
  • घर में एक बित्ते से अधिक बड़ी पत्थर की मूर्ति की स्थापना करने से गृहस्वामी की सन्तान नहीं होती। उसकी स्थापना पूजा स्थान में ही करनी चाहिए।
  • पूजास्थल में भगवान या मूर्ति का मुख पूर्व या पश्‍चिम की तरफ़ होना चाहिए और उत्तर दिशा की ओर नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसी दशा में उपासक दक्षिणामुख होकर पूजा करेगा, जो कि उचित नहीं है।
  • शयनकक्ष में पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। अगर जगह की कमी के कारण मंदिर शयनकक्ष में बना हो तो मंदिर के चारों ओर पर्दे लगा दें। इसके अलावा शयनकक्ष के उत्तर पूर्व दिशा में पूजास्थल होना चाहिए।
  • मूर्ति के आमने-सामने पूजा के दौरान कभी नहीं बैठना चाहिए, बल्कि सदैव दाएं कोण में बैठना उत्तम होगा।
    पूजन कक्ष में मृतात्माओं का चित्र वर्जित है। किसी भी श्रीदेवता की टूटी-फूटी मूर्ति या तस्वीर व सौंदर्य प्रसाधन का सामान, झाडू व अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए।
  • घर में कम से कम वर्ष में दो बार हवन में यज्ञ करवाएं।

 

3. घर का रसोईघर (Kitchen)

रसोईघर का स्थान हमारे जीवन और परिवार के लिए महत्त्वपूर्ण है। घर के मुख्य द्वार के सामने अगर आपका रसोईघर हो, तो उसका प्रभाव परिवार के आरोग्य पर पड़ता है। घर के दक्षिण-पूर्व कोने रसोई के स्थान के लिए सबसे आदर्श माने जाते है। दक्षिण-पूर्व दिशा ही रसोई के लिए उपयुक्त मानी गयी है। महिला के लिए सबसे अच्छा होगा कि खाना पकाते समय पूर्व दिशा का सामना करना पड़े। यह निश्चित रूप से अधिक समृद्धि और जीवन में खुशी लाएगा।

 

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रसोईघर के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Vatu Tips For Kitchen

  • रसोईघर हमेशा आग्नेय कोण (पूर्व दिशा) में ही होना चाहिए। रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व क्षेत्र सर्वोत्तम रहता है। यह उत्तर-पश्‍चिम में भी बनाया जा सकता है।
  • उत्तर-पश्‍चिम की ओर रसोई का स्टोर रूम, फ्रिज और बर्तन आदि रखने की जगह बनाएं।
  • रसोई के बीचोंबीच कभी भी गैस, चूल्हा आदि नहीं जलाएं और न ही रखें।
  • कभी भी उत्तर दिशा की तरफ़ मुख करके खाना नहीं पकाना चाहिए। स़िर्फ थोड़े दिनों की बात है, ऐसा मान कर किसी भी हालत में उत्तर दिशा में चूल्हा रखकर खाना न पकाएं।
  • रसोई में तीन चकले न रखें, इससे घर में क्लेश हो सकता है।
  • रसोई में हमेशा गुड़ रखना सुख-शांति का संकेत माना जाता है।
  • टूटे-फूटे बर्तन भूलकर भी उपयोग में न लाएं, ऐसा करने से घर में अशांति का माहौल बना रहता है।
  • यदि आपका किचन आग्नेय या वायव्य कोण को छोड़कर किसी अन्य क्षेत्र में हो, तो कम से कम वहां पर बर्नर की स्थिति आग्नेय अथवा वायव्य कोण की तरफ़ ही हो।
  • रसोई घर की पवित्रता व स्वच्छता किसी मंदिर से कम नहीं होनी चाहिए। ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
  • रसोईघर हेतु दक्षिण-पूर्व क्षेत्र का प्रयोग उत्तम है, किन्तु जहां सुविधा न हो वहां विकल्प के रूप में उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र का प्रयोग किया जा सकता है, किन्तु उत्तर-पूर्व मध्य व दक्षिण-पश्‍चिम क्षेत्र का सदैव त्याग करना चाहिए।

 

4. घर का मुख्य शयन कक्ष ( Master Bed- Room Of House)

मुख्य शयन कक्ष जिसे मास्टर बेडरूम भी कहा जाता है। बेडरूम आपका वह स्थान जहां आप अपना सबसे ज्यादा समय बिताते हें| पुरे दिन काम करने के बाद यह स्थान आपके शरीर और दिमाग को आराम और शांति प्रदान करता हैं| बेडरूम आपका घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की ओर होना चाहिए। अगर घर में एक मकान की ऊपरी मंजिल है तो मास्टर ऊपरी मंजिल मंजिल के दक्षिण-पश्चिम कोने में होना चाहिए। शयन कक्ष में सोते समय हमेशा सिर दीवार से सटाकर सोना चाहिए। पैर दक्षिण और पूर्व दिशा में करने नहीं सोना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर पैर करके सोने से स्वास्थ्य लाभ तथा आर्थिक लाभ की संभावना रहती है। पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोने से शरीर की थकान निकलती है, नींद अच्छी आती है।

 

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मुख्य शयन कक्ष के कुछ महत्वपूर्ण नियम -Vastu Tips For Master Bedroom

  • सबसे उत्तम दिशा पूर्व, ईशान और उत्तर है। वायव्य और पश्‍चिम सम है। आग्नेय, दक्षिण और नैऋत्य दिशा सबसे खराब होती है।
  • बच्चों का कमरा उत्तर – पश्चिम या पश्चिम में होना चाहिए और मेहमानों के लिए कमरा (गेस्ट बेड रूम) उत्तर पश्चिम या उत्तर – पूर्व की ओर होना चाहिए।
  • दक्षिण – पश्चिम का बेडरूम स्थिरता और महत्वपूर्ण मुद्दों को हिम्मत से हल करने में सहायता प्रदान करता है।
  • दक्षिण – पूर्व में शयन कक्ष अनिद्रा , चिंता , और वैवाहिक समस्याओं को जन्म देता है।
  • दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि कोण हें जो मुखरता और आक्रामक रवैये से संबंधित है। शर्मीले और डरपोक बच्चे इस कमरे का उपयोग करें और विश्वास प्राप्त कर सकते हैं। आक्रामक और क्रोधी स्वभाव के जो लोग है इस कमरे में ना रहे।
  • उत्तर – पश्चिम दिशा वायु द्वारा शासित है और आवागमन से संबंधित है | इसे विवाह योग्य लड़किया के शयन कक्ष के लिए एक अच्छा माना गया है। यह मेहमानों के शयन कक्ष लिए भी एक अच्छा स्थान है।
  • शयन कक्ष घर के मध्य भाग में नहीं होना चाहिए, घर के मध्य भाग को वास्तु में बर्हमस्थान कहा जाता है | यह बहुत सारी ऊर्जा को आकर्षित करता है जोकि आराम और नींद के लिए लिए बने शयन कक्ष के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, पढ़ने और लिखने की जगह पूर्व या शयन कक्ष के पश्चिम की ओर होनी चाहिए। जबकि पढाई करते समय मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • ड्रेसिंग टेबल के साथ दर्पण पूर्व या उत्तर की दीवारों पर तय की जानी चाहिए।
  • सेफ या तिजोरी, बेड रूम में दक्षिण कि दिवार के साथ रख सकते हें, खुलते समय उसका मुंह धन की दिशा, उत्तर की तरफ खुलना चाहिए।

 

5. घर का टायलेट (शौचालय) , स्नानघर (Toilet and Bathroom)

शौचालय (टॉयलेट) का अर्थ उस जगह से है, जहां शरीर की गंदगी को बाहर निकाला जाता है। यानी विसर्जन की जगह। वास्तु शास्त्र में दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम जोन को विसर्जन के लिए बेहतर माना गया है। यह दिशा सौर ऊर्जा की विपरित दिशा हैं अतः इसे अधिक से अधिक बंद रखना चाहिए। ऐसा न होने पर स्नानघर में नमक से भरा कटोरा रखने से लाभ प्राप्त होता है। ओवर हेड टेंक इसी दिशा में बनाना चाहिए। शौचालय चाहे कितना भी आकर्षक क्यों न हो, इसका निर्माण ब्रह्मांड के ऊर्जा नियमों के अनुसार नहीं हुआ है तो यह नकारात्मक ऊर्जा निकालता है, जो सीधे तौर पर उस घर की समृद्धि और वहां के निवासियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

आजकल अधिकांश नवनिर्मित मकानों में बेडरूम में अटैच बाथरूम का चलन बढ़ता जा रहा है और यह गलत भी है। इससे बेडरूम और बाथरूम की ऊर्जाओं के टकराव से हमारा स्वास्थ्य शीघ्र ही प्रभावित होता है। इससे बचने के लिए या तो बेडरूम में अटैच बाथरूम के बीच एक चेंज रूम अवश्य बनाया जाना चाहिए अथवा इसमें बाथरूम पर एक मोटा पर्दा डाला जाय और इस बात का भी ख्याल रहे कि बाथरूम का द्वार उपयोग के पश्चात बंद करके ही रखा जाय

 

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शौचालय / स्नानघर के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Vastu Tips For Toilet And Bath-Room

  • घर के उत्तर दिशा में बना शौचालय करियर संबंधी परेशानियां उत्पन्न करता है। इस दिशा में बने शौचालय वाले घरों में रहने वाले लोगों को धन कमाने का अवसर बहुत कम मिलता है और वे अपने जीवन में आगे भी नहीं बढ़ पाते हैं।
  • उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में बना शौचालय रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देता है। इस दिशा में बने शौचालय का प्रयोग करने वाले लोग मौसमी बीमारियों की वजह से लगातार बीमार पड़ते रहते हैं।
  • घर के पूर्व, उत्तर-पूर्व दिशा में बना शौचालय व्यक्ति को थकान और भारीपन महसूस कराता है।
  • जिन घरों में बाथरूम में गीजर आदि की व्यवस्था है, उनके लिए यह जरूरी है कि वे अपना बाथरूम आग्नेय कोण में ही रखें, क्योंकि गीजर का संबंध अग्नि से है।
  • बाथरूम या शौचालय हमेशा मकान के नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) कोण में अथवा नैऋत्य कोण व पश्चिम दिशा के मध्य में होना उत्तम है।
  • शौचालय में सीट इस प्रकार हो कि उस पर बैठते समय आपका मुख दक्षिण या उत्तर की ओर होना चाहिए।
  • ईशान कोण में कभी भी शौचालय नहीं होना चाहिए, नहीं तो ऐसा शौचालय सदैव हानिकारक ही रहता है।
  • शौचालय का द्वार उस घर के मंदिर, किचन आदि के सामने न खुलता हो।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार स्नानगृह में चंद्रमा का वास है तथा शौचालय में राहू का। यदि किसी घर में स्नानगृह और शौचालय एक साथ हैं तो चंद्रमा और राहू एक साथ होने से चंद्रमा को राहू से ग्रहण लग जाता है, जिससे चंद्रमा दोषपूर्ण हो जाता है।

 

6. अध्ययन कक्ष (Study Room Of House)

अध्ययन कक्ष पूर्व, उत्तर, ईशान तथा पश्चिम के मध्य में अध्ययन कक्ष बनाया जा सकता है। अध्ययन करते समय दक्षिण तथा पश्चिम की दीवार से सटाकर पूर्व तथा उत्तर की ओर मुख करके बैठें। अपनी पीठ के पीछे द्वार अथवा खिड़की न हो। अध्ययन कक्ष का ईशान कोण खाली हो। वास्तु अनुरूप चीजें अध्ययन कक्ष में रखने से रखने से जहां आपकी स्मरण शक्ति व बुद्धि में भी वृद्धि होगी, वहीं मन में उल्लास व जज्बा बना रहेगा, नकारात्मक विचार व आत्मग्लानि भी दूर हो जाएगी, अर्थात्‌ कुछ बातों को ध्यान में रख कर हम वास्तु निर्मित अध्ययन कक्ष में सकारात्मक ऊर्जा की बयार बहा सकते है जिससे हर क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्चतम सफलता मिलेगी।

 

अध्ययन कक्ष के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Vastu Tips For Study Room

  • चौकोर टेबल का प्रयोग करें जो चारों पांवों में समानता रखती हो।
  • टेबल को दक्षिण-पश्चिम या दरवाजे के सामने न लगाएं। इससे बुद्धि का पतन होता है। टेबल को दरवाजे या दीवार से न सटाएं। जिससे विषय याद रहेगा, रूचि बढ़ेगी।
  • उत्तर-पूर्व या पूर्व वाले कमरे में अध्ययन कक्ष की व्यवस्था करें यह शुभ, प्रेरणाप्रद रहेगा।
  • अध्ययन कक्ष को पूजा कक्ष से सटा कर और दरवाजे की स्थिति उत्तर-पूर्व या पश्चिम में रखें। किन्तु दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में न रखें इससे भ्रम उत्पन्न होते हैं।
  • दक्षिण व दक्षिण-पूर्व दिशा वाले कमरे में अध्ययन कक्ष की व्यवस्था से बचें, यह अशुभ व तनावयुक्त स्थिति दे सकता है।
    कोशिश करें कि नार्थ-वेस्ट में बैठकर भी अध्ययन न करें। इससे पढ़ाई में मन नहीं लगेगा, एकाग्रता भंग होगी।
  • जो परीक्षार्थी घर से बाहर या हॉस्टल आदि में रहते हैं। जिनके लिए यह संभव नहीं हो वह पूर्व दिशा की ओर मां सरस्वती या नृत्य करते या लिखते हुए गणेश जी का चित्र स्थापित करें और उन्हें अध्ययन के पहले और बाद में प्रणाम करें तो उनका भी एनर्जी लेवल बढ़ेगा।
  • यह सुनिश्चित करें कि अध्ययन कक्ष में आईने का प्रतिबिंब न हो जिसके परिणामस्वरूप छात्र पर प्रभाव हो सकता है।
  • अध्ययन कमरे की दीवारों के रंग हमेशा हल्के रंग से रंगने चाहिए जैसे कि हल्के रंग छात्र की एकाग्रता की शक्ती में वृध्दि करने लिए खासकर आशाजनक साबित हो रहे हैं। साथ ही अध्ययन के कमरे के लिए गहरे रंगो का इस्तेमान करने से बचना चाहिए।
  • अध्ययन कक्ष के लिए वास्तु के अनुसार बहुत अच्छी रोशनी होना हमेशा लाभदायक है। मंद रोशनी बच्चों की एकाग्रता तथा ध्यान देने की शक्ति को कमजोर कर देती है। किसी भी छात्र के लिए सूरज की रोशनी यह सबसे अच्छा प्रकाश संभव है।
  • उत्तर-पूर्व में मां सरस्वती, गणेश की प्रतिमा और हरे रंग की चित्राकृतियां लगाएं।

 

7. घर का लिविंग रूम (Living Room)

घर वास्तु टिप्स में लिविंग रूम हमारे घर का वो कमरा होता है, जहां हम अपने दिन का ज़्यादातर वक्त शान्ति से गुजारते हैं। यह वह कमरा होता है जहां घर के सारे लोग दिन में कम से कम 1 बार जमा होते हैं। लिविंग रूम सिर्फ सजावट का केंद्र, मेहमानों का स्वागत करने के लिए या स्वस्थ बोलचाल के लिए ही नहीं होते। आप वास्तु की मदद से अपने घर में सुख शान्ति और अपनेपन का माहौल पैदा कर सकते हैं। उत्तर या पूर्व की ओर मुंह किये हुए घर के लिए लिविंग रूम उत्तर पूर्वी दिशा में होना चाहिए। इसी तरह पश्चिम की तरफ मुंह किये हुए घर के लिए लिविंग रूम उत्तर पश्चिमी दिशा में होना चाहिए।आपका घर दक्षिण की तरफ हो तो आपका लिविंग रूम दक्षिण पूर्वी दिशा की तरफ होना चाहिए।

 

 

लिविंग रूम के कुछ महत्वपूर्ण नियम – Vastu Tips For Living Room

  • घर उत्तर की तरफ है तो लिविंग रूम उत्तर पश्चिमी दिशा में होना चाहिये।
  • अगर घर पश्चिम की तरफ हो तो लिविंग रूम उत्तर पश्चिमी दिशा में होना चाहिए।
  • अगर घर दक्षिण की तरफ हो तो लिविंग रूम दक्षिण पूर्वी दिशा में होना चाहिए।
  • घर के सोफे को दक्षिण या पश्चिम की दीवारों की तरफ रख सकते हैं, पर ये उन्हें छूना नहीं चाहिए।
  • फर्नीचर को इस तरह घर में लगाएं कि इससे आपको लिविंग रूम से अन्य कमरों में जाने में कोई परेशानी ना हो।
  • फर्श पर या किसी टेबल पर एक पोडियम लैंप (podium lamp) रखने का प्रयास करें, जिसमें लाल या पीली रोशनी जलती हो। यह रोशनी दक्षिण पूर्वी दिशा की तरफ पड़ने वाले सामानों पर पड़नी चाहिए।
  • पानी के झरने और फिश एक्वेरियम (Water Fountains & Fish Aquarium) लिविंग रूम में पानी उत्तर दिशा की तरफ ही रखें। यह एक छोटा पानी का झरना हो सकता है जो सारा दिन चलता रहे।
  • कमरे में उत्तर की तरफ एक छोटा सा मछलियों का एक्वेरियम भी रखें, जिसमें 1 परिवार की 7 मछलियाँ (लाल और सुनहरी) तथा अलग परिवारों की दो मछलियाँ हों।
  • फर्नीचर का मुंह किसी प्रकार के बाहर निकले हुए या घिसे हुए कोने के सामने नहीं रहना चाहिए। इससे कई तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इन्हें ढकने के लिए इनके सामने ऐसे घरेलू पौधे लगाएं जिनमें कांटे ना हों।
  • लिविंग रूम की उत्तरी दीवारों पर लम्बी दूरी के जल के स्त्रोतों की तस्वीर लगाएं, जिसमें पानी के गुणों का वर्णन सामने आ सके। किसी भी प्रकार की हिंसात्मक व डरावनी पेंटिग व सीनरी नहीं लगानी चाहिए।
  • टेलीविज़न (television) को लिविंग रूम में रखना चाहते हैं तो इसे इस तरह रखें कि यह कमरे के पूर्वी या उत्तरी कोने में रहे।
  • घड़ी को हमेशा पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाया जाये।
  • आपके बैठने के स्थान के सामने घड़ी लगाना अति शुभकारी माना गया है, चूंकि घड़ी समय का प्रतीक है, और समय को हमेशा आगे चलना चाहिए।
  • ड्रॉइंग रूम में यदि आप भोजन भी करते है तो, डाइनिंग टेबल को आग्नेय कोण की दिशा के मध्य में रखना चाहिए जिससे आप स्वस्थ्य रहेंगे।
  • अपने घर में कभी भी बहते हुए झरने, ताजमहल,हिंसक जानवर, नटराज, रोते हुए बच्चे, महाभारत, डूबता हुआ जहाज, युद्ध की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए इससे घर में क्लेश, दरिद्रता में व्रद्धि होती है।

 

घर में  किस रंग का इस्तेमाल करे – Color For House For Good Vastu

अपने बैठक कक्ष में सफेद, गुलाबी, पीला, क्रीम या हल्का भूरा रंग तथा हल्का नीला का प्रयोग करना चाहिए।

शयन कक्ष की दीवारों पर आसमानी, हल्का गुलाबी, हल्का हरा तथा क्रीम रंग का प्रयोग करवाना चाहिए।

भोजन के कमरा में  हल्का हरा, गुलाबी, आसमानी या पीला रंग शुभ फल देता है।

रसोईघर के लिए सबसे शुभ रंग सफेद अथवा क्रीम होता है। यदि रसोईघर में वास्तु दोष है तो रसोईघर के आग्नेय कोण में लाल रंग का भी प्रयोग कर सकते है।

अध्ययन कक्ष के लिए क्रीम कलर, हल्का जामुनी, हल्का हरा या गुलाबी, आसमानी या पीला रंग का प्रयोग करना अच्छा होता है।

स्नानघर एवं  शौचालय में सफेद, गुलाबी या हल्का पीला या हल्का आसमानी रंग का प्रयोग करने से मन को शकुन मिलता है।

हमारी छतें प्रकाश को परावर्तित कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं इस कारण से इस स्थान पर ऐसे रंग का प्रयोग करना चाहिए जो परावर्तन में सहायक हो। छत के लिए सबसे उपयुक्त रंग है सफेद अथवा क्रीम

शांति और एकाग्रता का प्रतीक सफेद,  हल्के नीले  या पीले रंग  का प्रयोग पूजा / मंदिर कक्ष में करना चाहिए। आध्यात्मिक रंग  गेरुआनारंगी का प्रयोग करना शुभ होगा।

घर के मध्य भाग में ब्रह्म का निवास स्थान होता है इस स्थान में गहरे या भड़कीले भूरा, लाल, नीला, पीला हरा आदि रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस स्थान पर अन्धेरा नहीं होना चाहिए अतः प्रकाश में वृद्धि करने के लिए सफेद या हल्के रंगों का प्रयोग करना चाहिए।

 

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